प्रायः विवाह के अवसर पर वर-वधू की कुण्डली का मिलान करते समय यह प्रश्न उठता है कि ‘मंगलीक दोष’ क्या है और इसका इतना विशेष महत्व क्यों है। मंगलीक दोष होने या न होने से जातक के वैवाहिक जीवन, सुख-शांति और भविष्य पर गहरा प्रभाव पड़ता है। इसी दोष की शांति हेतु मंगलभात पूजा (Ujjain Mangal Bhat Puja) को अत्यंत प्रभावशाली माना गया है, जिसे उज्जैन की पावन भूमि पर विधि-विधान से कराया जाता है।
मंगल को पाप ग्रह माना गया है। जब यह लग्न, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में स्थित होता है, तो उस भाव पर इसके कुप्रभाव को मंगल दोष या मंगलीक दोष कहा जाता है। प्रथम भाव से शरीर, चतुर्थ से सुख, सप्तम से दांपत्य जीवन, अष्टम से आयु व बाधाएँ तथा द्वादश भाव से व्यय और हानि का विचार किया जाता है। यदि मंगल इन भावों को प्रभावित करता है, तो विवाह में विलंब, पारिवारिक कलह और मानसिक तनाव जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। इन दोषों के निवारण हेतु Mangal Dosh Puja Ujjain में कराना विशेष फलदायी माना गया है।
शास्त्रों के अनुसार, चतुर्थ भाव में मंगल की दृष्टि होने पर भौतिक सुख में कमी, सप्तम भाव में दांपत्य जीवन में बाधा, अष्टम भाव में जीवन में विघ्न तथा द्वादश भाव में अत्यधिक व्यय होता है। ऐसे में शास्त्रोक्त विधि से की गई मंगलभात पूजा (Ujjain Mangal Bhat Puja) और Mangal Dosh Puja Ujjain में करने से दोष शांत होता है और वैवाहिक जीवन में संतुलन व सुख की प्राप्ति होती है।
प्राय: 28 वर्ष पश्चात् जातक पर 'मंगलीक दोष' समाप्त हो जाता है। इसके अलावा निम्न स्थितियों में 'मंगलीक दोष' समाप्त हो जाता है।
1.मेष राशि का मंगल लग्न में, वृश्चिक राशि का चतुर्थ भाव में, मकर राशि का सप्तम भाव में, कर्क राशि का अष्टम भाव में, धनु राशि का द्वादश भाव में हो तो मंगलीक दोष नगण्य हो जाता है।
2. वर-वधू (विवाह के लिए) की कुण्डली मिलाते समय 1, 4, 7, 8 अथवा 12वें भाव में शनि स्थित हो तो 'मंगलीक दोष' समाप्त हो जाता है।
3.कुण्डली के द्वितीय भाव में चन्द्र + शुक्र की युति हो, केन्द्र में चन्द्र + मंगल की युति हो अथवा गुरु मंगल को पूर्ण दृष्टि से देखता हो।
4.मेष या वृश्चिक का मंगल चतुर्थ भाव में, कर्क या मकर का मंगल सप्तम भाव में, मीन का मंगल अष्टम भाव में तथा मेष या कर्क का मंगल व्यय भाव में स्थित हो।
5.बली गुरु शुक्र की राशि या अष्टम भाव में हो तथा सप्तमेशं बलवान होकर केन्द्र अथवा त्रिकोण में हो।
6. वर-कन्या में से किसी एक की कुण्डली में मंगलीक योग हो तथा दूसरे की कुण्डली में मंगल योग कारक भाव में कोई पाप ग्रह स्थित हो तो 'मंगलीक दोष' शून्य हो जाता है।
लाल किताब के मूल ग्रन्थ के अनुसार मंगल ग्रह चतुर्थ और अष्टम भाव में स्थित होने पर अशुभ फल प्रदान करता है, जबकि प्रथम, द्वितीय, तृतीय, पंचम, षष्ठ, सप्तम, नवम, दशम, एकादश और द्वादश भावों में स्थित मंगल को शुभ माना गया है। शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि यदि मंगल किसी भाव में अकेला बैठा हो, तो जातक का जीवन चिड़ियाघर के कैदी की भाँति सीमित और संघर्षपूर्ण हो जाता है। ऐसे जातक को जीवन में आगे बढ़ने के लिए निरंतर बाधाओं का सामना करना पड़ता है। इस स्थिति से मुक्ति के लिए मंगलभात पूजा (Ujjain Mangal Bhat Puja) को अत्यंत प्रभावशाली उपाय माना गया है।
जब मंगल दोष प्रबल होता है, तब वैवाहिक जीवन, मानसिक शांति और पारिवारिक सुख प्रभावित होते हैं। लाल किताब और अन्य ज्योतिष ग्रंथों में ऐसे दोषों की शांति हेतु विशेष पूजा का उल्लेख मिलता है। उज्जैन की पवित्र भूमि पर संपन्न की जाने वाली Mangal Dosh Puja Ujjain में करने से मंगल के अशुभ प्रभाव शांत होते हैं और जीवन में संतुलन आता है। शास्त्रोक्त विधि से की गई मंगलभात पूजा (Ujjain Mangal Bhat Puja) जातक को मानसिक और भौतिक राहत प्रदान करती है। इसी प्रकार Mangal Dosh Puja Ujjain में कराने से विवाह, करियर और पारिवारिक जीवन में आ रही रुकावटें धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं।
कई लोगों के जीवन में विवाह में देरी, बार बार रिश्तों में तनाव या घर में अशांति बनी रहती है। ऐसी स्थिति में Ujjain Mangal Dosh Puja एक सरल और भरोसेमंद उपाय मानी जाती है। यह पूजा मंगल ग्रह के नकारात्मक प्रभाव को शांत करने के लिए की जाती है।
उज्जैन भगवान महाकाल की पावन नगरी है। यहां क्षिप्रा नदी के तट पर की गई Ujjain Mangal Dosh Puja को विशेष फलदायी माना जाता है। श्रद्धा और विधि से की गई पूजा से विवाह की रुकावटें धीरे धीरे दूर होने लगती हैं।
Ujjain Mangal Dosh Puja पूरी तरह वैदिक विधि से कराई जाती है। पंडित जी हर मंत्र और हर चरण को आसान भाषा में समझाते हैं। भक्त को केवल मन से पूजा में शामिल होना होता है जिससे मन को शांति मिलती है।
इस पूजा से वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है। परिवार में चल रहा तनाव कम होता है। नौकरी और कामकाज में स्थिरता महसूस होती है। Ujjain Mangal Dosh Puja से आत्मविश्वास बढ़ता है और मन हल्का महसूस करता है।
मेष लग्न में मंगलीक मेष लग्न का जातक मंगलीक हो तो निम्नलिखित उपाय करके सुखद जीवन व्यतीत कर सकता है।
1. लाल रुमाल अपने पास रखें।
2. तंदूर में मीठी रोटी पकाकर कुत्ते को खिलाये।
3. चाँदी के कड़े में लोहे की कील लगवाकर धारण करे।
4. दक्षिण दिशा के द्वार वाले मकान में न रहे।
5. ताँबे अथवा सोने की अंगूठी में साढ़े पाँच रत्ती मूंगा जड़वा कर धारण करे। नकली मूंगा हानिकर सिद्ध होगा।
6. किसी कंवारी कन्या को मीठा खिलाये। बहन को भी मीठा खिलायें।
अगर आप अपने जीवन की परेशानियों का सरल समाधान चाहते हैं तो Ujjain Mangal Dosh Puja के लिए आज ही संपर्क करें। सही समय पर की गई पूजा से जीवन में सकारात्मक बदलाव साफ महसूस होने लगता है।