Enquire Form

कुंभ विवाह / अर्क विवाह

कुंभ विवाह / अर्क विवाह उज्जैन
वैदिक विवाह संस्कार

कुंभ विवाह / अर्क विवाह पूजा उज्जैन

उज्जैन की पवित्र नगरी में वैदिक विधि-विधान एवं शास्त्रोंक्त संकल्प के साथ कुंभ विवाह एवं अर्क विवाह पूजा संपन्न कराई जाती है। कुंडली में उपस्थित मांगलिक दोष, वैधव्य योग या विवाह में आ रही अनावश्यक बाधाओं को दूर करने के लिए यह एक प्रामाणिक एवं फलदायी वैदिक उपाय है।

ज्योतिषाचार्य पंडित हरिओम शर्मा जी द्वारा शास्त्रोक्त मंत्रोच्चार, संकल्प, होम-हवन एवं पारंपरिक पूजा अनुष्ठान संपन्न कराया जाता है, जिससे जातक के दांपत्य जीवन में सुख, शांति और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

सूर्य कन्या अर्क विवाह

अर्क विवाह क्या है?

जिस किसी पुरुष के विवाह मे विलम्ब हो रहा हो या अन्य किसी दोष को दूर करने के लिए उस पुरुष के विवाह के पूर्व सूर्य पुत्री जिन्हे अर्क वृक्ष के रूप मे पूजा जाता है के साथ विवाह किया जाता है, जिससे उस पुरुष के विवाह मे आ रहे समस्त प्रकार के दोषो से मुक्ति मिल जाती है। पुरुष का विवाह से पूर्व किए गए इस प्रकार के विवाह को अर्क विवाह पूजा के नाम से जाना जाता है।

भगवान विष्णु घट विवाह

घट विवाह क्या होता है?

किसी कन्या के विवाह मे आ रही समस्याओ या किसी दोष को दूर करने के लिए उस कन्या के विवाह से पूर्व घट (कुम्भ) जिसमे भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित की जाती है के साथ विवाह किया जाता है, जिससे कन्या के विवाह मे आ रही सभी बधाओ और दोषो से मुक्ति मिल जाती है। कुम्भ विवाह होने के पश्चात भगवान विष्णु की मूर्ति को जलाशय मे विसर्चित कर कन्या का विवाह इच्छुक वर के साथ कर दिया जाता है। कन्या के विवाह से पूर्व किए गए विवाह को घट विवाह या कुम्भ विवाह पूजा के नाम से जाना जाता है।

कुम्भ विवाह या घाट विवाह की विधि
10+ वर्षों का अनुभव Pandit Hariom Sharma Ji
वैदिक विवाह विधि

कुम्भ विवाह या घाट विवाह की विधि

इस प्रक्रिया में कन्या और मिट्टी से बने हुए घट के बीच प्रतीकात्मक विवाह का आयोजन किया जाता है। कुम्भ विवाह ,एक सामान्य विवाह की तरह ही होता है जिसमें कन्या के माता पिता द्वारा कन्या दान किया जाता है, फेरों की रस्म भी निभाई जाती है। पंडित के द्वारा विवाह के मंत्रो का भी उच्चारण किया जाता है।जब सम्पूर्ण प्रक्रिया पूरी हो जाती है तो घट को तालाब या नदी के बहते पानी में प्रवाहित कर दिया जाता है।घट विवाह के बाद कन्या का विवाह वास्तविक वर के साथ किया जाता है।

कुम्भ विवाह, कन्या का प्रथम विवाह माना जाता है और घट (कुम्भ ) कन्या के प्रथम पति का प्रतीक होता है। इस कुम्भ विवाह से कन्या की कुंडली में मंगल दोष, मंगल की खराब स्थिति या वैधव्य योग का दोष समाप्त हो जाता है।

किसी भी जातक (वर) की कुंडली में इस तरह के दोष हों, तो सूर्य कन्या अर्क वृक्ष से व्याह करना, अर्क विवाह कहलाता है। इस प्रक्रिया से दाम्पत्य सुखों में वृद्धि होती है और वैवाहिक विलंब दूर होता है।

अनुष्ठान प्रक्रिया

कुंभ एवं अर्क विवाह की वैदिक चरणबद्ध विधि

उज्जैन में संपन्न होने वाली कुंभ एवं अर्क विवाह पूजा पूर्णतः शास्त्रोंक्त विधि-विधान, शुद्ध मंत्रोच्चार एवं संकल्पबद्ध प्रक्रिया के अंतर्गत संपन्न होती है:

1 संकल्प एवं गौरी-गणेश पूजन
2 घट / अर्क वृक्ष प्रतिष्ठा एवं विष्णु पूजन
3 कन्यादान, गठबंधन एवं पवित्र फेरे
4 वैदिक शांति मंत्र, हवन एवं पूर्णाहुति
5 पवित्र जल में घट विसर्जन व रक्षा संकल्प
शास्त्रोक्त मान्यता: अर्क विवाह मुख्य रूप से पुरुषों में विवाह विलंब व मंगल दोष निवारण हेतु और कुंभ (घट) विवाह कन्याओं में वैधव्य योग एवं मांगलिक दोष शांति के लिए किया जाता है। यह अनुष्ठान उज्जैन में सिद्ध मुहूर्त में अनुभवी पुरोहित द्वारा ही संपन्न कराया जाना चाहिए।
मुख्य कारण एवं लक्षण

अर्क कुम्भ विवाह क्यो आवश्यक है?

  • किसी भी पुरुष और कन्या की कुंडली मे मंगल दोष हो।
  • किसी की कुंडली मे तलाक या दो विवाह हो।
  • किसी कन्या या पुरुष की कुंडली मे दोहरा मांगलिक दोष हो तो अर्क कुम्भ विवाह करना चाहिए।
  • किसी कन्या की कुंडली मे वैधव्य दोष हो तो कुम्भ विवाह आवश्यक हो जाता है।
  • किसी पुरुष ने दो शादिया की हो और उसकी दोनों पत्नीया मर चुकी हो, तो संबन्धित व्यक्ति अगर दोबारा अगर शादी के लिए तैयार हो तो उस व्यक्ति का अर्क विवाह करना आवश्यक होता है।
सामान्य प्रश्नोत्तरी

Frequently Asked Questions (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

1

Q1. अर्क विवाह और कुंभ विवाह में क्या अंतर है?

+

अर्क विवाह पुरुषों (वर) के लिए सूर्य पुत्री अर्क वृक्ष के साथ किया जाता है, जबकि कुंभ (घट) विवाह कन्याओं (वधु) के लिए भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित मिट्टी के कलश (घट) के साथ संपन्न कराया जाता है।

2

Q2. क्या कुंभ विवाह के पश्चात मंगल दोष और वैधव्य दोष समाप्त हो जाता है?

+

हाँ, शास्त्रोंक्त मान्यता के अनुसार घट विवाह को प्रथम विवाह माना जाता है जिससे कुंडली का मंगल दोष अथवा वैधव्य योग घट पर अंतरित हो जाता है और वास्तविक विवाह में कोई दोष नहीं रहता।

3

Q3. अर्क एवं कुंभ विवाह पूजा में कितना समय लगता है?

+

यह संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान लगभग 2 से 3 घंटे का होता है, जिसमें संकल्प, गौरी-गणेश पूजन, प्रतिष्ठा, फेरे, हवन और विसर्जन की संपूर्ण विधि शामिल होती है।

4

Q4. उज्जैन में यह पूजा कराना क्यों सर्वश्रेष्ठ माना जाता है?

+

उज्जैन बाबा महाकाल की मोक्षदायिनी पावन नगरी तथा मंगल देव की उत्पत्ति भूमि (मंगलनाथ तीर्थ) है। यहाँ शास्त्र सम्मत विधि से किया गया दोष निवारण अत्यंत फलदायी और शीघ्र प्रभावी माना जाता है।

5

Q5. पूजा हेतु बुकिंग एवं शुभ मुहूर्त की जानकारी कैसे प्राप्त करें?

+

आप पंडित हरिओम शर्मा जी से सीधे फोन +91-7999646783 या WhatsApp पर संपर्क कर अपनी कुंडली के आधार पर अनुकूल तिथि एवं शुभ मुहूर्त निर्धारित करवा सकते हैं।

विवाह बाधा एवं दोष निवारण परामर्श हेतु

अपनी कुंडली के अनुसार शुभ मुहूर्त एवं पूजा संकल्प की पूरी जानकारी प्राप्त करें

पंडित जी से अपनी समस्या का समाधान पाने के लिए आज ही संपर्क करें